Shri Vishnu Chalisa in Hindi (श्री विष्णु चालीसा)

Shri Vishnu Chalisa in Hindi – Vishnu is one of the principle deities of Hinduism. Vishnu is said to be preserver in the Hindu triad (Trimurti). Vishnu as the preserver protector has taken many avatars like Rama in Ramayana and Krishna in Mahabharata whenever the world is in danger. Vishnu is also known with names Narayana, Jagannath, Vasudeva, Vitoba, and Hari. Have a look at Vishnu Chalisa in Hindi.

Shri Vishnu Chalisa in Hindi – विष्णु जी हिन्दू धर्म के देवता हैं। विष्णु जी त्रिदेवों में से एक हैं। मान्यतानुसार जगत का पालन श्री हरि विष्णु जी ही करते हैं। भगवान विष्णु को दया-प्रेम का सागर माना जाता है। विष्णु जी देवी लक्ष्मी (विष्णुजी की पत्नी) के साथ क्षीरसागर में वास करते हैं। सच्चे मन से आराधना करने पर वह व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूर्ण करते हैं।

Shri Vishnu Chalisa in Hindi

|| दोहा ||

विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलया |
किरत कुछ वर्णन करू दीजे ज्ञान बताया ||

॥चौपाई॥

नमो विष्णु भगवान खरारी |
कशत नाशवान अखिल विहारी ||
प्रबल जगत मे शक्ति तुम्हारी |
त्रिभुवन फल रही उजियरी ||

सुंदर रूप मनोहर सूरत |
सरल स्वभाव मोहिनी मूरत ||
तन पर पीताम्बर अती सोहात |
बेजनती माला मन मोहत ||

शंख चक्र कर गदा विराजे |
देखत देतये असुर दल भाजे ||
शतय धरम मद लोभ ना गाजे |
काम क्रोध मद लोभ ना छाजे ||

शन्त्भक्त साजन म्नराजन |
दनुज असुर दुष्टन दल गाजन ||
सच उपजाये कष्‍ट सब भांजन |
धोश मिटाए करात जन सन्न्जन ||

पाप कट भाव सिधु उतरण |
कष्ट नाशकर भ्क्त उभर्न ||
करात अनेक रूप प्रभु धारण |
कावाल आप भागती के कारण ||

धारणी देनु बन तुम्ही पुकारा |
तब तुम रूप राम का धारा ||
भर उतार असुर दल मार |
रावण आदिक को संहारा ||

आप वरह रूप बनाया |
हीरण्यश को मार गिराया ||
धार मतयास तन सिंधु बनाया |
छोड़ रतन को निकालाए ||

अमिलाख आसुर दुन्दु मचाया |
रूप मोहिनी आप दिखाया ||
देवन को अमरात पान कराया |
असूरन को चाबी से बहलाया ||

कुर्म रूप धार सिंधु मथाया |
मंडराचल गिरी तुरान उठाया ||
शंकर का तुम फंड छुड़ाया |
भस्मासुर का रूप देखाया ||

वेदन को जब असुर डुबया |
कर प्रबंदा उन्ही तुंतालाया ||
मोहित बनकर खलही नचाया |
उशी कर से भ्सम कराया ||

असुर जलनदर अति बलदाई |
शंकर से उन किन्ही लड़ाई ||
हर पर शी सकल बनाए |
किन सती से चल खल जाई ||

सुमिरन किन तुम्हे शिवरनी |
बतलाई सब विपत कहानी ||
तब तुम बने मुनेश्वर ज्ञानी |
व्रनदा की सब सुरती भूलनी ||

हो शपर्श धर्म शरती मानी |
हानि असुर उऊर शिव सनातनी ||
तुमने धुर प्रहलाद उभरे |
हिरनकुश आदिक खाल मारे ||

गणिका और आजमील तारे |
भाहूत भक्त भाव सिंडु उतरे ||
हारहू सकल संताप हमारे |
कृपा करहू करी सिरजन हरे ||

देखहू मई नित दर्श तुम्हारे |
दिन बंदू भक्तन हितकारे ||
चाहत आपका सेवक दर्शन |
करहू दया अपनी मधुसूदन ||

जानू नही योगे जप पूजन |
होये यागी शिस्तुति अनुमोतन ||
शील्डाया संतोष शिशन |
विधीत नही वत्रबोध विलशान ||

करहू आपका किस विधि पूजन |
कुमति विलोक होते दुख भीषण ||
करहू प्रदम कों विदुसिम्रन |
कों बाती मे करहू समर्पण ||

सुर मुनि करात सदा सिवकाई |
हर्षित राहत परम गति पाए ||
दिन दुखीं पर सदा सहाइ |
निज जन जन लावे अपनाई ||

पाप दोष संताप नाशो |
भाव बंदन से मुक्त करायो ||
सूट संपति दे सच उपजाओ |
निज चरण का दास बनाओ ||

निगम सदा से वाने सूनाओ |
पाते सुने सो जान सच पावे ||

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